श्री माधवान्ग्री जलजद्वय नित्य सेवा प्रेमा विलाशय परान्गुश पादभक्तम् ।
कामादि दोष हरमात्म पदस्रुतानाम् रामानुजम् यतिपतिम् प्रणमामि मूर्ध्ना ॥